

होली पर साहस और सुरूर दोनों बढ़ जाते है मुझसे पूछा गया कि आप अपनी मनपसंद होली किसके साथ मनाना चाहेंगे और हम किस पिनक में आत्म स्वीकरोक्ति कर बैठे कि हम अपनी होली अपनी भूतपूर्व प्रेमिकाओं के साथ मनाना चाहेंगे.और होली पर मित्र लोग(जिनके होने पर आपको किसी दुश्मन कीअतिरिक्त आवश्यकता नहीं रहती)उस का लिंक श्रीमती जी को दिखा बैठे.सुबह से चिली वाला भूचाल घर में आ गया ससुर जी और साले साहब दुनाली लेकर घर पहुँच चुके है.अब सफाई मन मनुहार हो रही है.पड़ोस मोहल्ले के लोग पूछ रहे है आखिर बात क्या हुई?तो हमने अपने ब्लॉग का यु आर एल दे दिया और यह पोस्ट ठेल दी--और कहा जाओ जाकर खुद ही देख लो--यह है हमार निक्सन की वाटर गेट नुमा आत्म स्वीकारोक्ति-
मैं अपनी होली अपनी कल्पनाओं में अपनी तीन प्रेमिकाओं के साथ मनाना चाहूँगा जिनसे आम हिन्दुस्तानी की भांति इक तरफ़ा प्यार किया था...पहली तो वह थी जब हम छठी में पढ़ते थे और हमारे बापू ने पजामे के कपडे को खाकी रंग में रंगवा कर हमारे लिए जीवन की पहली पेंट सिलवाई थी और तब हमारे पड़ोस में रहने वह आई थी..वह अपनी खूबसूरत पोशाक में बार्बी डाल थी,तो हमारी नई ड्रेस भी बकरे की खाल थी...बस, प्यार दीवाना होता है मस्ताना होता है...जो हमें हो गया ..हम पढ़ाई छोड़ कर इश्क करने लगे...और पहले टेस्ट में ही काफी सारे अंडे इकट्ठे हो गये ...फिर वही होता है जो होना होता है..हमारे इश्क का भूत बापू और गुरूजी की लातो थप्पड़ों और डंडो से झाडफूंक कर उतार दिया गया...हम इजहार तक नहीं कर सके और प्यार उतर गया...काश होली पर वह बार्बी हमारे साथ हो तो उससे कम से कम कह तो दूं कि ........??
दूसरी हमें कालेज में मिली जब उसने संगीत के फंक्शन में ''उई शमाशा उई ...ले जा प्यार जरा सा'' पर डांस किया था और हमारा पूरा प्यार ले गई...बदले में हमने ''जंगी राम की हवेली'' प्ले किया ,कविता पाठ भी किया ..त्याग इतना किया कि हमारी पढ़ाई एक बार फिर कमबख्त इश्क कि बलि चढ़ गई ..हम उसको इम्प्रेस करने के लिए बास्केट बाल,क्रिकेट,चेस एथेलेटिक्स के कालेज चेम्पियन बने पर उसकी रुचि पढ़ाकू लड़कों में थी (न कि लड़ाकू पठाकों में)जो हम बन न सके..हम अपनी आँखों के सामने उसको स्वार्थी कमीने किताबी कीड़ों से ठगा जाता देखते रहे ..उससे कहना चाह रहे थे कि, ''शमाशा,ये तुमसे नहीं तुम्हारे नोट्स से प्यार करते है...और तुम्हारे प्रोफ़ेसर पिता से प्रेक्टिकल में नंबर लेना चाहते है...ये तुम्हे धोखा दे रहे है.. तुम्हारा असली प्यार मैं हूँ मैं!'' पर शब्द दिल में घुट कर रह गए.आवाज दिल के गहरे तहखाने से कभी भी बाहर नहीं निकली.हाँ हम कालेज से रेस्टिकेट होकर निकल गए जब हमने बर्दाश्त नहीं हुआ और एक पढ़ाकू प्रेम चोपड़ा का (उससे प्रेम का इजहार करता देख) खोपडा खोल दिया...और इसके साथ ही हम उसके दिल से भी निकल गए हमेशा के लिए....इस होली पर वह साथ होती तो हम उसे कह डालते...शमाशा,.....!!!!!!!!!!
तीसरी हमें बी एड के दौरान मिली...वह स्टाइलिश थी,माड थी...हमने पहली बार जींस टॉप में कोई लड़की देखी थी,पर हम अपनी पुरानी गलतियों से काफी सीख चुके थे इसलिए उससे बात तो कर ली...उसके लिए तीन दोस्तों ने चंदा करके एक गिटार लिया..गिटार की क्लास भी ज्वाइन की ..पर गिटार के गुरूजी आलाप सिखाने में ज्यादा रुचि रखते थे...और आलाप से तो हमारे किये कराए पर पानी फिर सकता था..हमने रूंआसे होकर गुरूजी से विनती की ..पर गुरूजी ने कहा संगीत तो साधना है इसे साधने के लिए जीवन भी कम पड़ता है.हमारा गिटार हमारी उँगलियों से प्रेम धुन बजाने के लिए तरसता रहा...और बी एड समाप्त होने आई...हम उससे भी अपने प्रेम का इजहार न कर सके...तो सोचा उससे ही इजहार करवा लिया जाए...हमने एक ऑटो ग्राफ बुक ली और उससे अनुरोध किया कि उस पर हमारे लिए कुछ लिख कर दे...हमें पूरी रात नींद नहीं आई...दुसरे दिन उसने ऑटो ग्राफ बुक लौटाई और बाय! कहते हुए चली गयी.हमने धडके दिल से पढ़ा,उसमे लिखा था-
''नेवर बी डांटेड फ्राम फेलिअर्स,फॉर फेलिअर्स आर द स्टेपिंग स्टोंस टू द सक्सेस''
इस होली पर वह साथ होती तो उसे कहते ''स्टाइलिश, ..........????
और आखिर में उन प्रेमिकाओं की गली में जाने पर हमारा क्या हश्र हुआ यह आप खुद पढ़ ले---
दवा मिलेगी ये सोच के हम जहर पी आए तेरी गली में
उतर गया है बुखार सारा पड़े वो जूते तेरी गली में
लुका छिपी ये नजर की कैसी,हंसी से हमको बना रहे हो
गधे पे चढ़ के लो हम ये आए बने बनाए तेरी गली में
हरे हरे नोट औ करारे जो भी थे उनकी निकल पड़ी है
तेरी तो किस्मत में हम जो आये है सिक्के खोटे तेरी गली में
सुना है तुमने बड़े बड़ों को छका दिया है उसी गली में
तुम्हारे बापू से मांग लेते कि हम जो होते तेरी गली में
लिखा तुझे ख़त तो तेरे भाई ने कैसे कर दी मेरी धुनाई
मेरी मुहब्बत का रायता तो बिखर गया ये तेरी गली में
यूँ वीर है हम मसल दें हाथी न डर है कोई जो बाघ आये
है गाडजिल्ला जो बाप तेरा, पकड़ मसल दे तेरी गली में
तुम्हारे गालों पे रंग मल कर जो चंग बजता है मेरे दिल का
सुरंग होली हो संग तुम हम तो भंग पीते तेरी गली में
प्रकाश पाखी
दुविधा में दोनों गए माया मिली ना राम,आपसे गुजारिश की इस तरह के खतरनाक प्रयोग घर पर न करें यहाँ यह सब उच्च स्तर के प्रोफेशनल्स की निगरानी में किया गया है, फिर भी यह हाल है!
आप सब को होली की शुभकामनाए !
और आशा करता हूँ जिन मित्रों ने भूचाल लाने में महती भूमिका निभाई है वे दुनाली संकट में हमारा सहयोग करेंगे!