बुधवार, 30 मार्च 2011

क्या भारत पाक का मैच फिक्स है?



कल अखबार में पढ़ा था कि सटोरियों के अनुसार मैच भारत जीतेगा.परन्तु अगर तेंदुलकर ने शतक लगाया तो भारत हार जाएगा.अभी मैच देख रहा हूँ और मुझे बड़ी निराशा हो रही है.पाकिस्तान की टीम तेंदुलकर के पाच केच छोड़ चुकी है.तेंदुलकर ७४ रन बना चुके है.धोनी जरूरत से ज्यादा धीमा खेल रहे है.मैं यह पोस्ट केवल इसलिए लिख रहा हूँ कि कही सटोरियों की बाते सच न हो जाए.तेंदुलकर के कैच छोड़ने के पीछे कारण हो सकता है कि पकिस्तान की टीम सट्टेबजो के चुंगल में है.वह या उसके कुछ खिलाड़ी सट्टेबाजो के संपर्क में है वे शायद कैच छोड़ कर तेंदुलकर को शतक बनाने देना चाहते है ताकि टीम पर मैच हरने की मजबूरी न आये.अब अगर अखबार में लिखी भविष्य वाणी (सटोरियों) सच हो तो मुझे एक खेल प्रेमी के रूप में निराशा होगी. 
  अब तेंदुलकर बिना सेकड़ा बनाए आउट हो गए है....तो भारत कि जीत पक्की.

मंगलवार, 18 जनवरी 2011

फिल्म समीक्षा--चलो संभल के, रहो संभल के- ए मिशन टू रोड सेफ्टी !



भाई लोगों ने मिलकर एक फिल्म बना इज डाली,फिलिम टोटल टल्ली पर है ...साला टल्ली शूटर टल्ली होकर इस दुनिया से इज कल्टी मार गया...ऐसे इज बहुत शरीफ लोग भी दारू पीकर गाड़ी चलाते ऊपर चले जाते है ...तो क्या ये फिलिम तो एक दम हिट है बोस !

शुक्रवार, 24 दिसम्बर 2010

रविवार, 10 अक्तूबर 2010

माजरा कुछ नहीं, बस साथी हाथ बढाया था

मेरी पोस्ट पिछले कई दिनों से मेरे मित्रों के फोलोवर लिंक में अप डेट नहीं हो रही थी ..तो निराश होकर ब्लॉग लिखना ही छोड़ दिया...आज अचानक ब्लोगर के आंकड़े देखे तो सुखद आश्चर्य हुआ कि अभी भी इस ब्लॉग पर लोगो का आना लगा हुआ है...शायद ही इससे अधिक मनोबल बढाने वाली कोई और बात हो.अयोध्या का फैसला सुकून देने वाला लगा...भारत कोमन्वेल्थ में गोल्ड जीत रहा है यह ख़ुशी की बात है.
सुनने में आ रहा है कि अयोध्या में मंदिर मस्जिद निर्माण के लिए सभी लोग एक हो रहे है...मंदिर बनाए में मुसलमान भाई साथ देंगे और  मस्जिद बनाने में हिन्दू कार सेवा करेंगे...सपना सा लगता है ऐसा होना .पर दिल चाहता है ऐसा ही हो...कौमी एकता की एक ऐसी मिसाल कायम हो और अयोध्या के ये मंदिर और मस्जिद दुनियां में सर्वश्रेष्ठ बने.समय बदल रहा है...भारत महाशक्ति बन रहा  है...क्योंकि हमारे देश का लोकतंत्र और सामाजिक समरसता बेमिसाल है.

उसने अपना दिल चीर के दिखाया था.
खुदा भी था वहीँ जहाँ राम समाया था,

नफरत के दरिया में दोनों बहने लगे थे 
सियासत ने इस कदर जुल्म ढहाया था.

बड़ी ही हिकारत से देखा था हरबार उसको 
जख्मो पे जिसने मरहम आज लगाया था

देख उसको जो कह रहा है सब तुझे दूंगा 
खंजर से कल जिसका तूने खून बहाया था  

सियासत कांप रही थी,तख़्त हिलने लगे थे 
माजरा कुछ नहीं, बस साथी हाथ बढाया था 
आपका शुक्रिया! 

बृहस्पतिवार, 8 जुलाई 2010

नेट पर वापसी-प्रकाश पाखी


काफी दिनों से नेट से दूर रहा.वर्ष के लक्ष्यों को भली भाँती प्राप्त कर लिया तो पुरस्कार स्वरूप स्थानान्तरण हरे भरे पहाड़ों में होगया.बहुत भागम भाग के बाद कुछ सुकून मिला.काम थोडा कम है और दुनिया से दूरी है.प्रदेश की अधिक वर्षा का इलाकाहै.बस एक कमी है...यहाँ पर नेट नहीं है.यही तो काम मुझे सौंपा गया है.इस इलाके के कार्यालय और प्रक्रिया को पूरे राज्य और देश से कंप्यूटर से जोड़ना.स्थानान्तरण का सबसे बुरा असर बच्चों पर पड़ता है.नयी स्कूल नयी किताबें और नए एडमिशन.पर अपनी तो अब आदत पड़ चुकी है.उम्मीद करता हूँ अब कुछ समय बरसों से छूटे काम पूरे करने के लिए मिलेगा.दोस्तों दूरी और देरी के लिए माफ़ी चाहता हूँ...मेरी पोस्ट अब भी आपके ब्लॉग पर अप डेट नहीं हो रही है.कोई मदद कर ले तो अच्छा लगेगा.चालीस किलोमीटर दूर आकर ब्लॉग पर पोस्ट ठेल रहा हूँ.क्योंकि इंटर नेट यही उपलब्ध है.फिलहाल बरसात का आनंद  ले रहा हूँ.
पिछली बार गाँव गया तो गाय- बछड़े की एक तस्वीर केमरे में कैद कर ली थी.तो वही आपको भी दिखा रहा हूँ.
प्रकाश पाखी .

रविवार, 14 मार्च 2010

विदा... प्रकाश पाखी


कई दिनों से कुछ समस्याओं से दो चार हो रहा हूँ.एक तो लेप टॉप का भट्टा बैठ गया है.दूसरा मेरी लिखी पोस्ट कहीं अप डेट नहीं हो रही ही.तीसरा एम् बी ए की परीक्षा शुरू हो रही है.चौथा वित्तीय वर्ष के अंतिम माह में लक्ष्य को पूरा करना है.पांचवी हाई कोर्ट में नौ रिट्स सरकार के विरुद्ध दर्ज हुई है और उनमे मैं प्रभारी अधिकारी के नाते जवाब देने के लिए जोधपुर आ जा रहा हूँ.
पर इनमे अच्छाई यह है कि लेप टॉप पर न जाने पर पढने के लिए समय मिल रहा है.रिट्स के जवाब देने जाने पर संजय से ब्लोगिया मीटिंग हो रही है.यानि हर काम का दूसरा पहलू सुखद है तो एन्जॉय कर रहा हूँ.
मुद्दे की बात यह है कि अब अप्रेल तक आपसे दूर रहूँगा.और तब तक आपसे उम्मीद करता हूँ कि आपमें कोई मुझे यह बताए कि मेरी नई पोस्ट्स मेरे अनुसरण कर्ताओं के ब्लॉग पर अप डेट नहीं हो रही है ...आपकी शुभकामनाओं और समाधान कि आशा करते हुए विदा लेता हूँ
आपका
प्रकाश
(अजी,थोड़ा माफ़ करे...यह पोस्ट हेल्लो !हेल्लो !! माइक टेस्टिंग जैसी है...देखना चाहता हूँ कि टेम्पलेट चेंज करने के बाद दोस्तों के यहाँ पोस्ट अप डेट हो रही है या नहीं)

रविवार, 28 फरवरी 2010

बार्बी,शमाशा और स्टाइलिश के साथ मेरी होली


होली पर साहस और सुरूर दोनों बढ़ जाते है मुझसे पूछा गया कि आप अपनी मनपसंद होली किसके साथ मनाना चाहेंगे और हम किस पिनक में आत्म स्वीकरोक्ति कर बैठे कि हम अपनी होली अपनी भूतपूर्व प्रेमिकाओं के साथ मनाना चाहेंगे.और होली पर मित्र लोग(जिनके होने पर आपको किसी दुश्मन कीअतिरिक्त आवश्यकता नहीं रहती)उस का लिंक श्रीमती जी को दिखा बैठे.सुबह से चिली वाला भूचाल घर में आ गया ससुर जी और साले साहब दुनाली लेकर घर पहुँच चुके है.अब सफाई मन मनुहार हो रही है.पड़ोस मोहल्ले के लोग पूछ रहे है आखिर बात क्या हुई?तो हमने अपने ब्लॉग का यु आर एल दे दिया और यह पोस्ट ठेल दी--और कहा जाओ जाकर खुद ही देख लो--यह है हमार निक्सन की वाटर गेट नुमा आत्म स्वीकारोक्ति-

मैं अपनी होली अपनी कल्पनाओं में अपनी तीन प्रेमिकाओं के साथ मनाना चाहूँगा जिनसे आम हिन्दुस्तानी की भांति इक तरफ़ा प्यार किया था...पहली तो वह थी जब हम छठी में पढ़ते थे और हमारे बापू ने पजामे के कपडे को खाकी रंग में रंगवा कर हमारे लिए जीवन की पहली पेंट सिलवाई थी और तब हमारे पड़ोस में रहने वह आई थी..वह अपनी खूबसूरत पोशाक में बार्बी डाल थी,तो हमारी नई ड्रेस भी बकरे की खाल थी...बस, प्यार दीवाना होता है मस्ताना होता है...जो हमें हो गया ..हम पढ़ाई छोड़ कर इश्क करने लगे...और पहले टेस्ट में ही काफी सारे अंडे इकट्ठे हो गये ...फिर वही होता है जो होना होता है..हमारे इश्क का भूत बापू और गुरूजी की लातो थप्पड़ों और डंडो से झाडफूंक कर उतार दिया गया...हम इजहार तक नहीं कर सके और प्यार उतर गया...काश होली पर वह बार्बी हमारे साथ हो तो उससे कम से कम कह तो दूं कि ........??

दूसरी हमें कालेज में मिली जब उसने संगीत के फंक्शन में ''उई शमाशा उई ...ले जा प्यार जरा सा'' पर डांस किया था और हमारा पूरा प्यार ले गई...बदले में हमने ''जंगी राम की हवेली'' प्ले किया ,कविता पाठ भी किया ..त्याग इतना किया कि हमारी पढ़ाई एक बार फिर कमबख्त इश्क कि बलि चढ़ गई ..हम उसको इम्प्रेस करने के लिए बास्केट बाल,क्रिकेट,चेस एथेलेटिक्स के कालेज चेम्पियन बने पर उसकी रुचि पढ़ाकू लड़कों में थी (न कि लड़ाकू पठाकों में)जो हम बन न सके..हम अपनी आँखों के सामने उसको स्वार्थी कमीने किताबी कीड़ों से ठगा जाता देखते रहे ..उससे कहना चाह रहे थे कि, ''शमाशा,ये तुमसे नहीं तुम्हारे नोट्स से प्यार करते है...और तुम्हारे प्रोफ़ेसर पिता से प्रेक्टिकल में नंबर लेना चाहते है...ये तुम्हे धोखा दे रहे है.. तुम्हारा असली प्यार मैं हूँ मैं!'' पर शब्द दिल में घुट कर रह गए.आवाज दिल के गहरे तहखाने से कभी भी बाहर नहीं निकली.हाँ हम कालेज से रेस्टिकेट होकर निकल गए जब हमने बर्दाश्त नहीं हुआ और एक पढ़ाकू प्रेम चोपड़ा का (उससे प्रेम का इजहार करता देख) खोपडा खोल दिया...और इसके साथ ही हम उसके दिल से भी निकल गए हमेशा के लिए....इस होली पर वह साथ होती तो हम उसे कह डालते...शमाशा,.....!!!!!!!!!!

तीसरी हमें बी एड के दौरान मिली...वह स्टाइलिश थी,माड थी...हमने पहली बार जींस टॉप में कोई लड़की देखी थी,पर हम अपनी पुरानी गलतियों से काफी सीख चुके थे इसलिए उससे बात तो कर ली...उसके लिए तीन दोस्तों ने चंदा करके एक गिटार लिया..गिटार की क्लास भी ज्वाइन की ..पर गिटार के गुरूजी आलाप सिखाने में ज्यादा रुचि रखते थे...और आलाप से तो हमारे किये कराए पर पानी फिर सकता था..हमने रूंआसे होकर गुरूजी से विनती की ..पर गुरूजी ने कहा संगीत तो साधना है इसे साधने के लिए जीवन भी कम पड़ता है.हमारा गिटार हमारी उँगलियों से प्रेम धुन बजाने के लिए तरसता रहा...और बी एड समाप्त होने आई...हम उससे भी अपने प्रेम का इजहार न कर सके...तो सोचा उससे ही इजहार करवा लिया जाए...हमने एक ऑटो ग्राफ बुक ली और उससे अनुरोध किया कि उस पर हमारे लिए कुछ लिख कर दे...हमें पूरी रात नींद नहीं आई...दुसरे दिन उसने ऑटो ग्राफ बुक लौटाई और बाय! कहते हुए चली गयी.हमने धडके दिल से पढ़ा,उसमे लिखा था-
''नेवर बी डांटेड फ्राम फेलिअर्स,फॉर फेलिअर्स आर द स्टेपिंग स्टोंस टू द सक्सेस''
इस होली पर वह साथ होती तो उसे कहते ''स्टाइलिश, ..........????


और आखिर में उन प्रेमिकाओं की गली में जाने पर हमारा क्या हश्र हुआ यह आप खुद पढ़ ले---

दवा मिलेगी ये सोच के हम जहर पी आए तेरी गली में
उतर गया है बुखार सारा पड़े वो जूते तेरी गली में

लुका छिपी ये नजर की कैसी,हंसी से हमको बना रहे हो
गधे पे चढ़ के लो हम ये आए बने बनाए तेरी गली में

हरे हरे नोट औ करारे जो भी थे उनकी निकल पड़ी है
तेरी तो किस्मत में हम जो आये है सिक्के खोटे तेरी गली में

सुना है तुमने बड़े बड़ों को छका दिया है उसी गली में
तुम्हारे बापू से मांग लेते कि हम जो होते तेरी गली में

लिखा तुझे ख़त तो तेरे भाई ने कैसे कर दी मेरी धुनाई
मेरी मुहब्बत का रायता तो बिखर गया ये तेरी गली में

यूँ वीर है हम मसल दें हाथी न डर है कोई जो बाघ आये
है गाडजिल्ला जो बाप तेरा, पकड़ मसल दे तेरी गली में

तुम्हारे गालों पे रंग मल कर जो चंग बजता है मेरे दिल का
सुरंग होली हो संग तुम हम तो भंग पीते तेरी गली में


प्रकाश पाखी
दुविधा में दोनों गए माया मिली ना राम,आपसे गुजारिश की इस तरह के खतरनाक प्रयोग घर पर न करें यहाँ यह सब उच्च स्तर के प्रोफेशनल्स की निगरानी में किया गया है, फिर भी यह हाल है!
आप सब को होली की शुभकामनाए !
और आशा करता हूँ जिन मित्रों ने भूचाल लाने में महती भूमिका निभाई है वे दुनाली संकट में हमारा सहयोग करेंगे!