शुक्रवार, 27 मार्च 2009

इंस्टीटयुट फॉर प्यूर एंड अप्लाइड बाबागिरी

संस्थान के विशाल एवं हरे भरे केम्पस में बनी सीमेंट की शानदार सड़क पर रेंगती हुई एक स्कोडा ओक्टाविया कार एडम बिल्डिंग के गेट पर रुकती है।प्रकृति द्वारा प्रदत्त शकल के अतिरिक्त अन्य प्रयुक्त सहायक सामग्री से सज्जन दिखने का प्रयास करते मि।कबाड़वाला अपने सुमनोहर वस्त्र अमनोहर आनन पुत्र के साथ कार से बाहर निकलते है. इन्क्वारी काउंटर पर बैठी लड़की को पहले घूरने और बाद में पूछने पर उन्हें एडमिशन खंड का रास्ता दिखाया गया.कुछ देर बाद पिता पुत्र वहां पहुंचते है जहाँ काउंसलिंग हो रही थी.यहाँ पर पहले से कुछ लोग दीवार के सहारे लगी कुर्सियों पर गोद में थैला या ब्रीफकेस लिए ऐसे बैठे थे जैसे की वे बैंक में पैसा जमा कराने के समय बैठते है.
बारी आने पर दोनों उस बंद कमरे में प्रविष्ट होते है जहा पहले से तीन व्यक्ति जिनमे एक आकर्षक महिला थी,मेज के उस ओर बैठे थे।उनकी आँखों में गरिमामय लालच तैर रहा था। कमरे में एयर कंडिशनर की हवा से माहौल कुछ सहज हो रहा था।
'आईए मि।कबाड़वाला...!बिराजिए,सर्व प्रथम हम आपको बधाई देना चाहेंगे कि आपका पुत्र देश भर के उन चंद स्टूडेंट्स में है जिन्होंने बाबागिरी के शानदार केरिएर के लिए रिटर्न एक्जाम में क्वालिफाय किया है।जैसा कि आप जानते है यहाँ मात्र ६० सीटें है।उसमे भी सरकारी नार्म्स और आरक्षण क्र बाद १२ सीटें मेनेजमेंट कोटे से शेष बचती है'।
दोनों कुर्सी पर बैठ जाते है।साहबजादे द्वारा महिला बोर्ड मेंबर को आवश्यकता से अधिक घूरे जाने पर बाप द्वारा कोहनी ठूंस कर मर्यादा नियमो की जानकारी प्रदान की गई।
'पर,मैं पहले बाबागिरी फील्ड के स्कोप के बारे में जानना चाहूंगा।'
'सर,यह इंडस्ट्री आज की सबसे ग्रोइंग इंडस्ट्री है।जैसा कि आप जानते है हमारा संस्थान प्यूर एंड अप्लाइड बाबागिरी में विश्व प्रसिद्द है।और कई विश्व प्रसिद्द संस्थानों ने इसे मान्यता दे रखी है,शीघ्र ही हम विदेशों में अपनी ब्रांचेज खोलने वाले है...'
'पर, इसमें इनवेस्टमेंट ......?'
'देखिये,बाबागिरी के लिए आवश्यक सारे आस्पेक्ट्स हम कवर करते है।अप्लाइड बाबागिरी में मार्केटिंग के फील्ड में बड़ा स्कोप है।हमारे यहाँ इसकी दो सीटें मेनेजमेंट कोटे से उपलब्ध है।प्यूर बाबागिरी में मीडियामेनेजमेंट,पर्सनेलिटी डेवलपमेंट और कथावाचन में भी दो दो सीटें है।और हंड्रेड परसेंट प्लेसमेंट गारंटी है।बस १० से ३० लाख का वन टाइम इनवेस्टमेंट करना है।
' रिटर्न ऑन इनवेस्टमेंट क्या रहता है......अनुमानित।'
'सर,बेचलर डिग्री के बाद तीन साल तक कुल इनवेस्टमेंट का ४० प्रतिशत रिटर्न मिल जाता है।पांच साल बाद ब्रेक ईवन हो जाता है।और इसके बाद जिंदगी भर ७० से ८० प्रतिशत रिटर्न मिलता रहता है।और फिर पब्लिक रिलेशंस वगैरह बनते है वो अलग,बस यह आपके स्टुडेंट की योग्यता पर निर्भर कितने बडे अधिकारी और नेता आपके शिष्य बनते है।अभी पिछली अलुमनी समारोह में संत पापड दास पधारे थे...हमारे यहाँ के तीन साल पहले के ग्रजुएट है...मंत्री मंडल तक उनका प्रभाव है।'
'योगा के क्षेत्र में एडमिशन नहीं मिल सकता....!'
'सारी सर,इसमें तो एक भी सीट खाली नहीं है...मेनेजमेंट कोटे में तीन सीटें थी पर सी एम ओ से फोन आने के बाद अब बची नहीं।'
'पापा,ट्रेंड तो योगा का चल रहा है ...'
कबाड़वाला ने बोर्ड के सदस्यों की तरफ देखा,जो कृत्रिम असमर्थता जाहिर करते हुए इनकार में सर हिला रहे थे।
'इसमें बोर्डिंग लोजिंग के चार्ज शामिल है...'
'नहीं,नहीं सर!यह तो मेनेजमेंट सीट पे एडमिशन का चार्ज है जो चंदे के मे रूप लिया जायेगा ।हाँ,आयकर में छूट अवश्य मिलेगी॥बोर्डर्स चार्जेज अलग है।'
'चलो ठीक है...योगा मे एडमिशन दिलवा दीजिये।'कबाड़वाला ने निर्णायक स्वर मे कहा।
'सारी,सर..!'
कबाड़वाला ने मुस्कराते हुए एक ब्रीफकेस,जिसमे सौ के नोटों के बण्डल थे खोल कर टेबल पर उनकी ओर सरका दिया और बोले,'ये पांच लाख है,चंदे से अलग.....!और भी कुछ हो तो बता दीजियेगा ।'
थोडी देर बाद कबाड़वाला और उनके सुपुत्र वापसी की राह पर थे।
कबाड़वाला के चेहरे पर विजयी मुस्कान थी।
उनके सुपुत्र महाशय रंगीन छवियों पर नज़रें डालते हुए एकाग्रता का अभ्यास कर रहे थे.

3 टिप्‍पणियां:

sanjay vyas ने कहा…

ऐ भाई आज तो बोल्ड कर दिया.धाँसू के बराबर वज़न का शब्द नहीं मिल रहा है. ज़रा पोस्ट के फॉण्ट की साइज़ बड़ी कर दो तो आचमन में आसानी रहेगी.

Kishore Choudhary ने कहा…

कई बार थका हारा मन "बाबे हो जाने " को चाहता है पर आपकी शैली ने इस कार्य के भीतरी नफे बखूबी समझाए हैं.

बेनामी ने कहा…

sandar