बुधवार, 16 सितंबर 2009

प्रतियोगी परीक्षा का भक्ति वेदांत-अध्याय 1

पी सी एस प्रतियोगी अर्जुन ने अपने सामने लाखों की संख्या में कीडे मकोडों की तरह खड़े बेरोजगार और बेहतर रोजगार की तलाश में युद्ध के लिए आये महारथी प्रतियोगियों को देखकर धुरंधर प्रतियोगेश्वर श्री कृष्ण से कहा-
हे कृष्ण,इस प्रकार पी सी एस में चयन के लिए इस प्रकार युद्ध में उपस्थित अपने मित्रो सम्बन्धियों और महारथियों को अपने समक्ष उपस्थित देख कर मेरे शरीर के अंग काँप रहे है,और मेरा मुंह सूखा जा रहा है.मेरे शरीर में रोंगटे खड़े हो रहे है..और पार्कर का पेन मेरे हाथ से सरक रहा है और मेरी त्वचा जल रही है.मेरा सर चकरा रहा है और है कृष्ण मुझे तो केवल अमंगल के कारण नजर आ रहे है.मुझे अपने जैसे ही भटकते बेरोजगारों को बेरोजगार रख कर नौकरी हासिल करने में न तो कोई अच्छाई नजर आ रही है और न ही उससे किसी प्रकार के राज्य सुख की इच्छा रखता हूँ.पिछले दस साल से परिक्षा देते गुरुजन,सालो से इसमें लगे में बड़े भाई,उनके मित्र,और मेरे मित्र और सम्बन्धी सबको बर्बाद रखकर भला क्या मिलेगा,भले ही वे मुझे मार डालें पर हे जीवों के पालक मैं इन सबसे लड़ने को तैयार नहीं हूँ.भले मुझे बदले में आई ए एस क्यों न मिलता हो.
हे गोविन्द,हमें ऐसे राज्य सुख से क्या लाभ क्योंकि जिन सारे लोगों के लिए हम पी सी एस बनना चाहते है..वे ही हमारे कम्पीटिशन में खड़े है...हम पिछले सात सालों से खूंटे की तरह खड़े आतताई,धुरंधर खापीड,प्रतियोगियों को परास्त करेंगे तो वे बर्बाद हो जाएंगे,और हमें पाप चढेगा....हे कृष्ण,इस प्रकार अपने ही जैसे प्रतियोगी बेरोजगारों को मार कर हम किस प्रकार सुखी हो सकते है...हे जनार्दन!पद लोभ से अभिभूत चित्त वाले ये लोग अपने परिवार या मित्रों से द्रोह करने में कोई दोष नहीं देखते है ...परन्तु हम लोग जो इनके परिवार को विनष्ट करने के अपराध को देख सकते है...ऐसे पाप कर्मो में क्यों प्रवृत हों?इनका चयन नहीं हुआ तो ये ठेकेदार बन कर भ्रष्टाचार और दलाली का धंधा करने को मजबूर हो जाएंगे...इससे हमारे नेता प्रदूषित हो जाएंगे....इससे हे वृष्णिवंशी,उनकी संताने बी एम डब्लू गाडियां फ़ुट पाथों पर सोते लोगों पर चढाएंगे...ऐसी अवांछित संतानों से नारकीय जीवन एवं अंतत उससे पिण्डोदक क्रिया लुप्त होने से कुलो के पितर लोग गिर जाएंगे..पतित हो जाएंगे,इस प्रकार कुल परंपरा को जो लोग विनष्ट करते है उनके सामुदायिक कार्यक्रम और परिवार कल्याण कार्यक्रम विनष्ट हो जाते है.और वे सदा नर्क जैसी जिन्दगी व्यतीत करते है...अहो!राज्य पद के लोभ से हम कितने जघन्य कर्म करने को उद्यत हो रहे है..अब मेरी परीक्षा के प्रश्न पत्र को छोड़ने की इच्छा से में कुछ भी लिख ना पाऊं तो ये मेरे लिए श्रेस्कर होगा...
संजय ने कहा-परीक्षा हाल के बाहर इस प्रकार कहकर अर्जुन ने अपने पार्कर पेन तथा ज्योमेट्री बॉक्स को एक तरफ रख दिया और शोक संतप्त चित से सीढियों के आसन पर बैठ गया.
(इस प्रकार श्रीमद प्रतियोगीता के प्रथम अध्याय के अर्जुन विषाद योग नामक भक्ति वेदान्त पूर्ण हुआ)

15 टिप्‍पणियां:

दिनेशराय द्विवेदी Dineshrai Dwivedi ने कहा…

कथा बहुत शानदार और प्रेरणास्पद है। देखते हैं मधुसूदन किस तरह अर्जुन को पार्कर पेन और ज्योमेट्री बॉक्स लेकर परीक्षा हॉल में जाने को प्रेरित करते हैं.

शोभना चौरे ने कहा…

आपकी आधुनिक गीता का प्रथम अध्याय तो अच्छा लगा|क्या केशव पार्कर पेन चलाने देगे ?या इंटरनेट से उपदेश देगे ?
आभार

दर्पण साह "दर्शन" ने कहा…

wah...

bahut hi acchi parody banai hai aapne...

....aur wo part to shandaar tha...

"...इस प्रकार कहकर अर्जुन ने अपने पार्कर पेन तथा ज्योमेट्री बॉक्स को एक तरफ रख दिया और शोक संतप्त चित से सीढियों के आसन पर बैठ गया. !!"

Pt.डी.के.शर्मा"वत्स" ने कहा…

अथ श्री कलयुगी गीता प्रथम अध्याय समाप्त!!

कथा का प्रथम अध्याय तो बहुत बढिया रहा...देखते हैं कि चक्रधर कौन सा ज्ञान देते हैं!!!
द्वितीयोध्याय की प्रतीक्षा रहेगी....

Udan Tashtari ने कहा…

सही है..कलयुगी गीता !!

प्रसन्न वदन चतुर्वेदी ने कहा…

बेहतरीन प्रस्तुति....बहुत बहुत बधाई...
मैनें अपने सभी ब्लागों जैसे ‘मेरी ग़ज़ल’,‘मेरे गीत’ और ‘रोमांटिक रचनाएं’ को एक ही ब्लाग "मेरी ग़ज़लें,मेरे गीत/प्रसन्नवदन चतुर्वेदी"में पिरो दिया है।
आप का स्वागत है...

sanjay vyas ने कहा…

प्रतियो'गीता' का प्रथम अध्याय पार्थ के मन में मची उथल पुथल को दर्शा रहा है.पार्थसारथी क्या उसे पी सी एस के कुरुक्षेत्र में ठेल पाएंगे? बड़ा सवाल है.अगले अध्याय में संजय क्या बताता है, देखना होगा.वैसे आज चुनौतिया बड़ी है.
हे, कथावाचक हमारे कान तुम्हारी ओर ही लगे हैं.

Harkirat Haqeer ने कहा…

आपकी आधुनिक गीता का प्रथम अध्याय शानदार लगा....!!

Kishore Choudhary ने कहा…

बहुत मस्त लिखा है
कुछ आपकी पंक्तियाँ उद्धृत करना चाहता था पर आपने कई ताले लगा रखे हैं तो कॉपी पेस्ट नहीं कर पाया. सुना है ज्योतिष में भी दखल है, आप इतने काम करते हैं कोई स्टेरायड हों तो मुझे भी बताईये !

अल्पना वर्मा ने कहा…

रोचक !

sandhyagupta ने कहा…

Bahut sari jagahon par is vyangya ke madhyam se aapne ek sath nishana sadha hai.Bilkul anutha andaaj aur dhardhar prastuti.

बेनामी ने कहा…

सब की इयता अलग अलग जगी, प्रतियोगिता में सफल को सुहाने सफ़र का अहसास ,असफल को व्यंग्य , नये राही को प्रेरणा का स्रोत ; लेकिन मुझे विश्वास है कि प्रतियोगेसवर श्री कृष्ण अर्जुन को सीढियों पर बैठने नहीं देंगे क्योंकि 'प्रतियोगी महाभारत' में नायक जो उन्हें बनना है ,अर्जुन तो अपनी समस्त न्युनताओ के साथ सीढियों पर बैठा है ,अगर अध्याय १८ है तो अर्जुन सभी का 'प्रतियोगी वध' करेगा , प्रथम सफल अध्याय हेतु 'प्रतियोगी वेदव्यास' को बधाई

बेनामी ने कहा…

सब की इयता अलग अलग जगी, प्रतियोगिता में सफल को सुहाने सफ़र का अहसास ,असफल को व्यंग्य , नये राही को प्रेरणा का स्रोत ; लेकिन मुझे विश्वास है कि प्रतियोगेसवर श्री कृष्ण अर्जुन को सीढियों पर बैठने नहीं देंगे क्योंकि 'प्रतियोगी महाभारत' में नायक जो उन्हें बनना है ,अर्जुन तो अपनी समस्त न्युनताओ के साथ सीढियों पर बैठा है ,अगर अध्याय १८ है तो अर्जुन सभी का 'प्रतियोगी वध' करेगा , प्रथम सफल अध्याय हेतु 'प्रतियोगी वेदव्यास' को बधाई

आकांक्षा~Akanksha ने कहा…

Bahut khub...!!

शारदीय नवरात्र की हार्दिक शुभकामनायें !!

हमारे नए ब्लॉग "उत्सव के रंग" पर आपका स्वागत है. अपनी प्रतिक्रियाओं से हमारा हौसला बढायें तो ख़ुशी होगी.

Apoorv ने कहा…

वाह..मनोरंजक और सामयिक मगर जबर्दस्त कन्सेप्ट ले कर आये हैं आप..अब साँख्ययोग का इंतजार रहेगा बेसब्री से..देख्नना है कि अर्जुन को निष्काम कर्म योग का ज्ञान मिलता है या सकाम कर्म योग का...