बुधवार, 30 सितंबर 2009

नई ब्लॉगवाणी के लिए सुझाव-मैथिली जी सिरिल जी शुक्रिया!

मैथिली जी और सिरिल जी आपका शुक्रिया, आप का काम बहुत बड़ा है और इसके लिए आपको कष्ट तो उठाना ही होगा.विवाद हमेशा उन लोगों की देन होते है जिनकी रचनात्मकता की सीमाएं होती है.पर ब्लॉगवाणी को सुधारते समय हमें इसके फोर्मेट को सकारात्मक पठन से जोड़ना चाहिए.पसंद नापसंद दोनों ईर्ष्या और दुश्मनी के गुटों में कीचड फैलाने का काम करते है.इसलिए ऐसे किसी मापदंड को लोकप्रियता या श्रेष्ठता का पैमाना नहीं बनाया जाना चाहिए.मेरे विचार से ब्लॉगवाणी समर्थकों की संख्या,ब्लॉग पर टिप्पणियों की कुल संख्या,पोस्ट की संख्या,चारसौ केरेक्टर या सौ शब्दों से लम्बी टिप्पणी करने वाले और पाने वाले ब्लॉग की सौ नई पोस्ट को लगातार दिखाने की व्यवस्था करे तो ठीक रहेगा.ब्लोग्वाणी में टिप्पणियों की श्रेष्ठता को भी महत्व दिया जाना चाहिए क्योंकि हर ब्लॉगर लेखक हो यह आवश्यक नहीं है वह एक अच्छा पाठक और आलोचक बने इससे लेखन का स्तर और समीक्षा का स्तर अच्छा होगा.मेरे सुझाव इस प्रकार है--
१.किसी पोस्ट का आकलन उसके पाठकों से किया जाना चाहिए.और पाठक कितने गंभीर है उसका पता उनकी की गयी टिप्पणियों की लम्बाई और स्तर से लगता है.अतः एक टिप्पणी कितने शब्दों में की गयी है उसको महत्व और रेंकिंग दी जानी चाहिए.हर पोस्ट पर की गयी टिप्पणी पर पसन्द नापसंद का विकल्प होना चाहिए जिससे जहर बुझी टिप्पणियों को बहुमत से खारिज किया जा सके.बेनामी टिप्पणियों को रेंकिंग में शामिल नहीं किया जाना चाहिए.अर्थात जिस पोस्ट पर ५० या १०० शब्दों से अधिक शब्दों में टिप्पणियाँ प्राप्त हुई है उन्हें श्रेष्ठता का एक आधार बनाया जाना चाहिए.
२.टिप्पणियों अगर अधिक प्राप्त हो तो तो भी ब्लॉग की श्रेष्ठता प्रमाणित होती है अतः किसी पोस्ट पर प्राप्त टिप्पणियों की संख्या को श्रेष्ठता का अन्य आधार बनाया जाना चाहिए.
३.किसी भी पोस्ट पर टिप्पणी करने वाला व्यक्ति वही होता है जो उस पोस्ट को विचार योग्य समझता है और इसीलिए वह उस पोस्ट को समय देता है.अतः ५० शब्दों से अधिक टिप्पणी करने वाले पाठकों के ब्लॉग को भी ब्लोग्वाणी में स्थान दिया जाए.
४.किसी ब्लॉग को विजिट करने वालों की संख्या के आधार पर भी एक रेंकिंग दी जानी चाहिए.
५.इसके अलावा अगर किसी ब्लॉग को ज्यादा लोग सुझाएँ तो उसे भी श्रेष्ठता का एक आधार बनाया जाना चाहिए,क्योंकि ब्लॉग सुझाने में ईमेल एड्रेस की आवश्यकता होती है तो यह भी श्रेष्ठ ब्लॉग चयन करने में सहायक है.
६.नए ब्लॉगर प्रोत्साहन के हकदार होते है और आने वाले समय में वे ही स्थापित ब्लॉगर बनते है.अतः उन्हें अलग से नए ब्लॉगर की पोस्ट में ब्लोग्वाणी द्वारा दिखाया जाये.
७.प्रथम दस रचनाओं तक ब्लॉगर को नये ब्लॉग की पोस्ट में दिखाना चाहिए.
८.कई श्रेष्ठ रचनाएं बहुत लम्बे समय और मेहनत के बाद सृजित की जासकती है.और वे रचनाएं बिना किसी की ध्यान में आए डूब जाती है.मेरा सुझाव है की लम्बे अंतराल के बाद आने वाली रचनाओं को अलग से दिखाना चाहिए.
9 इसके लिए एक माह से अधिक समय बाद किसी ब्लॉग पर आई नई पोस्ट को अलग से दिखाना चाहिए.
१०.किसी ब्लॉग के समर्थक या अनुसरण कर्ता भी ब्लॉग की श्रेष्ठता को प्रमाणित करते है अतः अधिक अनुसार कर्ताओं वाले ब्लॉग को भी श्रेष्ठ चयन का एक आधार बनाया जनाचाहिये.
११.ब्लोग्वाणी पर दिखाई जाने वाली हर पोस्ट पर विषय के ऑप्शन्स होने चाहिए और पाठक उसपर क्लिक करने पर एक जैसे विषय की सामग्री को सर्च करने में ज्यादा सटीकता रहेगी.फिलहाल ऐसा कोई तरीका नहीं है की किसी पोस्ट की विषय वास्तु को सही सही तरीके से ब्लॉग एग्रेगेटर पर ढूँढा जा सके.

ब्लॉगवाणी का प्रमुख उद्वेश्य एक ऐसा मंच प्रदान करवाना होना चाहिए जो हिंदी ब्लॉग जगत के लेखकों और पाठकों को अपनी पसंद की सामग्री पढने पढाने की सुविधा मिल सके और रोज प्रकाशित होने वाली हजारों पोस्ट्स में अपनी पसंद तक पहुँच सके.श्रेष्ठता का फैसला पाठक पर छोड़ दिया जाए.ब्लॉगवाणी तो अलग अलग पैमानों पर पोस्ट्स को छाँट के बस पाठको के सामने रखदे.कोई नया ब्लॉग अथवा नई पोस्ट अगर किसी पाठक वर्ग की पसंद बन भी जाती है तो इसका अर्थ यह कतई नहीं होता है की वह ब्लोग्वाणी पर सभी पाठकों की पसंद है.हरेक पोस्ट के पाठक वर्ग अलग होता है इसलिए किसी ब्लॉग एग्रेगेटर के माध्यम से यह तय नहीं किया जाना चाहिए की अमुक रचना या पोस्ट श्रेष्ठ है.मेरे विचार से ब्लॉगवाणी स्तरीय पोस्ट को पाठक के सामने रखने का प्रयास करे.इसके लिए अलग अलग आधारों पर प्रकाशित होने वाली पोस्ट्स को पाठकों के लिए प्रस्तुत करे तो ठीक रहेगा.पसंद को तो कृपया हटा दे तो बेहतर होगा.यह समझना जरा कठिन है की कैसे दस हजार ब्लॉग में दस व्यक्ति की पसंद सर्वश्रेष्ठ रचना हो जाती है. आपका आभार कि आपने अपनी ब्लॉग वाणी को हमारा कहकर इसे समर्पित कर दिया.और वापस ले आये.हम आपके प्रयासों में आपके साथ है.आशा करते है कि आपके प्रयासों से हिंदी रचनाकर्म की उन्नति होगी.

9 टिप्‍पणियां:

Apoorv ने कहा…

पूरी तरह सहमत हूँ आपकी बात से..हालाँकि मेरे खयाल से जब तक पसंद और विजिट को संकलित करने की फ़ूलप्रूफ़ व्यवस्था नही बनती..उनके बिना भी काम चल सकता है..अंततः पठन है आपके ब्लॉग का जो सबसे महत्वपूर्ण है..और सार्थक व ईमानदार टिप्पणियाँ भी..
गीता के अगले अध्याय का भी इन्तजार है अभी..

Udan Tashtari ने कहा…

सुझाव ध्यान से पढ़ने होंगे कुछ भी कहने के पूर्व..मगर आपकी सजगता आकर्षित करती है.

Kishore Choudhary ने कहा…

सुझाव अमूल्य हैं
तकनीक की दृष्टि से उपयोगी है या नहीं कह नहीं सकता पर मन को भा गयी है आपकी बातें.

खुशदीप सहगल ने कहा…

आपके सुझावों से अक्षरक्ष सहमत...पसंद वाले कॉलम को लेकर इतना विवाद है तो कुछ समय के लिए प्रयोग के तौर पर इसे हटा दिए जाने में परेशानी ही क्या है...यही मुझे समझ नहीं आ रहा है...

अविनाश वाचस्पति ने कहा…

@ खुशदीप सहगल


विवाद में ही संवाद है

बंद करना यानी रोकना रास्‍ता

कोई उचित हल नहीं।

दर्पण साह "दर्शन" ने कहा…

ji aapki baat se sehmat....

...par tab tak jaisa chal rha hai chalne diya jaave....
...kum se kum chitthon ki jankari to hoti rahegi...

sanjay vyas ने कहा…

मैथिलि जी और सिरिल जी का हिंदी ब्लोगिंग में योगदान अमूल्य है. एक नए ब्लोगर को अनजान कोनों से जब प्रतिक्रियाएँ मिलती हैं तो इसके पीछे ब्लोगवाणी की भूमिका क्या होती है,ये किसी के लिए अनजानी नहीं है .
आपके सुझाव इन्होंने अवश्य सहेज लिए होंगे.

Vivek Rastogi ने कहा…

सुझाव अच्छॆ हैं पर तकनीकी रुप से शायद इसमॆं समय सीमा ज्यादा लगे और ये कैसे किया जाये यह भी एक बड़ा कार्य है।

Babli ने कहा…

बहुत बढ़िया! सुझाव अच्छे हैं! दशहरे की हार्दिक शुभकामनायें!