रविवार, 28 फ़रवरी 2010

बार्बी,शमाशा और स्टाइलिश के साथ मेरी होली


होली पर साहस और सुरूर दोनों बढ़ जाते है मुझसे पूछा गया कि आप अपनी मनपसंद होली किसके साथ मनाना चाहेंगे और हम किस पिनक में आत्म स्वीकरोक्ति कर बैठे कि हम अपनी होली अपनी भूतपूर्व प्रेमिकाओं के साथ मनाना चाहेंगे.और होली पर मित्र लोग(जिनके होने पर आपको किसी दुश्मन कीअतिरिक्त आवश्यकता नहीं रहती)उस का लिंक श्रीमती जी को दिखा बैठे.सुबह से चिली वाला भूचाल घर में आ गया ससुर जी और साले साहब दुनाली लेकर घर पहुँच चुके है.अब सफाई मन मनुहार हो रही है.पड़ोस मोहल्ले के लोग पूछ रहे है आखिर बात क्या हुई?तो हमने अपने ब्लॉग का यु आर एल दे दिया और यह पोस्ट ठेल दी--और कहा जाओ जाकर खुद ही देख लो--यह है हमार निक्सन की वाटर गेट नुमा आत्म स्वीकारोक्ति-

मैं अपनी होली अपनी कल्पनाओं में अपनी तीन प्रेमिकाओं के साथ मनाना चाहूँगा जिनसे आम हिन्दुस्तानी की भांति इक तरफ़ा प्यार किया था...पहली तो वह थी जब हम छठी में पढ़ते थे और हमारे बापू ने पजामे के कपडे को खाकी रंग में रंगवा कर हमारे लिए जीवन की पहली पेंट सिलवाई थी और तब हमारे पड़ोस में रहने वह आई थी..वह अपनी खूबसूरत पोशाक में बार्बी डाल थी,तो हमारी नई ड्रेस भी बकरे की खाल थी...बस, प्यार दीवाना होता है मस्ताना होता है...जो हमें हो गया ..हम पढ़ाई छोड़ कर इश्क करने लगे...और पहले टेस्ट में ही काफी सारे अंडे इकट्ठे हो गये ...फिर वही होता है जो होना होता है..हमारे इश्क का भूत बापू और गुरूजी की लातो थप्पड़ों और डंडो से झाडफूंक कर उतार दिया गया...हम इजहार तक नहीं कर सके और प्यार उतर गया...काश होली पर वह बार्बी हमारे साथ हो तो उससे कम से कम कह तो दूं कि ........??

दूसरी हमें कालेज में मिली जब उसने संगीत के फंक्शन में ''उई शमाशा उई ...ले जा प्यार जरा सा'' पर डांस किया था और हमारा पूरा प्यार ले गई...बदले में हमने ''जंगी राम की हवेली'' प्ले किया ,कविता पाठ भी किया ..त्याग इतना किया कि हमारी पढ़ाई एक बार फिर कमबख्त इश्क कि बलि चढ़ गई ..हम उसको इम्प्रेस करने के लिए बास्केट बाल,क्रिकेट,चेस एथेलेटिक्स के कालेज चेम्पियन बने पर उसकी रुचि पढ़ाकू लड़कों में थी (न कि लड़ाकू पठाकों में)जो हम बन न सके..हम अपनी आँखों के सामने उसको स्वार्थी कमीने किताबी कीड़ों से ठगा जाता देखते रहे ..उससे कहना चाह रहे थे कि, ''शमाशा,ये तुमसे नहीं तुम्हारे नोट्स से प्यार करते है...और तुम्हारे प्रोफ़ेसर पिता से प्रेक्टिकल में नंबर लेना चाहते है...ये तुम्हे धोखा दे रहे है.. तुम्हारा असली प्यार मैं हूँ मैं!'' पर शब्द दिल में घुट कर रह गए.आवाज दिल के गहरे तहखाने से कभी भी बाहर नहीं निकली.हाँ हम कालेज से रेस्टिकेट होकर निकल गए जब हमने बर्दाश्त नहीं हुआ और एक पढ़ाकू प्रेम चोपड़ा का (उससे प्रेम का इजहार करता देख) खोपडा खोल दिया...और इसके साथ ही हम उसके दिल से भी निकल गए हमेशा के लिए....इस होली पर वह साथ होती तो हम उसे कह डालते...शमाशा,.....!!!!!!!!!!

तीसरी हमें बी एड के दौरान मिली...वह स्टाइलिश थी,माड थी...हमने पहली बार जींस टॉप में कोई लड़की देखी थी,पर हम अपनी पुरानी गलतियों से काफी सीख चुके थे इसलिए उससे बात तो कर ली...उसके लिए तीन दोस्तों ने चंदा करके एक गिटार लिया..गिटार की क्लास भी ज्वाइन की ..पर गिटार के गुरूजी आलाप सिखाने में ज्यादा रुचि रखते थे...और आलाप से तो हमारे किये कराए पर पानी फिर सकता था..हमने रूंआसे होकर गुरूजी से विनती की ..पर गुरूजी ने कहा संगीत तो साधना है इसे साधने के लिए जीवन भी कम पड़ता है.हमारा गिटार हमारी उँगलियों से प्रेम धुन बजाने के लिए तरसता रहा...और बी एड समाप्त होने आई...हम उससे भी अपने प्रेम का इजहार न कर सके...तो सोचा उससे ही इजहार करवा लिया जाए...हमने एक ऑटो ग्राफ बुक ली और उससे अनुरोध किया कि उस पर हमारे लिए कुछ लिख कर दे...हमें पूरी रात नींद नहीं आई...दुसरे दिन उसने ऑटो ग्राफ बुक लौटाई और बाय! कहते हुए चली गयी.हमने धडके दिल से पढ़ा,उसमे लिखा था-
''नेवर बी डांटेड फ्राम फेलिअर्स,फॉर फेलिअर्स आर द स्टेपिंग स्टोंस टू द सक्सेस''
इस होली पर वह साथ होती तो उसे कहते ''स्टाइलिश, ..........????


और आखिर में उन प्रेमिकाओं की गली में जाने पर हमारा क्या हश्र हुआ यह आप खुद पढ़ ले---

दवा मिलेगी ये सोच के हम जहर पी आए तेरी गली में
उतर गया है बुखार सारा पड़े वो जूते तेरी गली में

लुका छिपी ये नजर की कैसी,हंसी से हमको बना रहे हो
गधे पे चढ़ के लो हम ये आए बने बनाए तेरी गली में

हरे हरे नोट औ करारे जो भी थे उनकी निकल पड़ी है
तेरी तो किस्मत में हम जो आये है सिक्के खोटे तेरी गली में

सुना है तुमने बड़े बड़ों को छका दिया है उसी गली में
तुम्हारे बापू से मांग लेते कि हम जो होते तेरी गली में

लिखा तुझे ख़त तो तेरे भाई ने कैसे कर दी मेरी धुनाई
मेरी मुहब्बत का रायता तो बिखर गया ये तेरी गली में

यूँ वीर है हम मसल दें हाथी न डर है कोई जो बाघ आये
है गाडजिल्ला जो बाप तेरा, पकड़ मसल दे तेरी गली में

तुम्हारे गालों पे रंग मल कर जो चंग बजता है मेरे दिल का
सुरंग होली हो संग तुम हम तो भंग पीते तेरी गली में


प्रकाश पाखी
दुविधा में दोनों गए माया मिली ना राम,आपसे गुजारिश की इस तरह के खतरनाक प्रयोग घर पर न करें यहाँ यह सब उच्च स्तर के प्रोफेशनल्स की निगरानी में किया गया है, फिर भी यह हाल है!
आप सब को होली की शुभकामनाए !
और आशा करता हूँ जिन मित्रों ने भूचाल लाने में महती भूमिका निभाई है वे दुनाली संकट में हमारा सहयोग करेंगे!

19 टिप्‍पणियां:

'अदा' ने कहा…

हा हा हा हा हा
हा हा हा हा हा
प्रकाश जी,
आप ठीक तो हैं ना....कोई एम्बुलेंस, डोक्टर ...कुछ भी ज़रुरत हो तो बताइए....हा हा हा हा
मुझे आपसे बहुत बहुत ज्यादा हमदर्दी हो गई आज...इतना की देखिये ना आपको लिख ही बैठी..
मान गए आपको...हास्य की बौछार हो गई आज तो..
सच में...

'अदा' ने कहा…

आप को और आपके परिवार को होली कि शुभकामनाएं...!!

हरकीरत ' हीर' ने कहा…

बहुत खूब.....!!

वैसे आप शक्ल से तो ऐसे नहीं लगते .......(तीन-तीन एक्सपेरिमेंट करने वाले.)

दवा मिलेगी ये सोच के हम जहर पी आए तेरी गली में
उतर गया है बुखार सारा पड़े वो जूते तेरी गली में

हज़ल तो गुरु जी आश्रम में पढ़ चुके थे एक बार फिर रसास्वाद ले लिया .........

शाहिद मिर्ज़ा ''शाहिद'' ने कहा…

प्रकाश जी, आदाब
जज़्बात पर आकर हौसला अफ़ज़ाई करने के लिए शुक्रिया
मनोरंजक..अंदाज़ में हास्य और हज़ल प्रस्तुत की है आपने.
बधाई
होली की बहुत बहुत शुभकामनाएं.

Shilpi ने कहा…

हाँ जनाब जीजाजी,
बातें जरा कैसे मिजाज है आपके?बहुत पर निकल आये थे होली पर...अब दुनाली दिखी तो सिट्टी पिट्टी गुम!
हा हा हा !
-:)

abhijit ने कहा…

हा हा हा !
होली की शुभकामनाएं!

yadujit ने कहा…
इस टिप्पणी को लेखक द्वारा हटा दिया गया है.
अल्पना वर्मा ने कहा…

'लिखा तुझे ख़त तो तेरे भाई ने कैसे कर दी मेरी धुनाई
मेरी मुहब्बत का रायता तो बिखर गया ये तेरी गली में '
waah! aap ki teeno premikaon se mile!

khooob badhiya rahi ye kahaniyan bhi!

Bholi surat aur aise aise kisse!!!!!

-----[bura na mano holi hai!]------
-Very Nice presentation!

sanjay vyas ने कहा…

गिटार वाली क्लास.कुछ याद आता है.कई दिन तो उसके मोटे वाले तार पे ही भन भन बजाते रहे...इसके अलावा कुछ याद नहीं.सही में.

होली की शुभकामनाएं.

Udan Tashtari ने कहा…

हा हा!! आनन्द आ गया!!



ये रंग भरा त्यौहार, चलो हम होली खेलें
प्रीत की बहे बयार, चलो हम होली खेलें.
पाले जितने द्वेष, चलो उनको बिसरा दें,
खुशी की हो बौछार,चलो हम होली खेलें.


आप एवं आपके परिवार को होली मुबारक.

-समीर लाल ’समीर’

निर्मला कपिला ने कहा…

हा हा हा मुझे तो बहुत अच्छा लगा आपकी पिटाई हुयी पहले तो सुबीर के साथ मिल कर हमारे खिलाफ साजिश रची और जब हमारा भुर्ता बना तो झट से झूठी तसल्ली के लिये अपने जीजा जी को फोन लगा दिया -- जरूर उनसे बताया होगा कि दीदी ने आपके खिलाफ ऐसे लिखा है वर्ना वो मेरा ब्लाग तो पढते नहीं उन्हे कैसे पता चला कि उन्हें बुढा लिखा है???? तो ये सुबीर से भी अधिक पाखी की शरारत है---- अच्छा हुया जूते पडे---- अभी तो और पडेंगे जब इन प्रेमिकाओं के बारे मे भाभी को बताऊँगी----
हज़ल क्या लिखी है कमाल कर दिया।
लुका छिपी ये नजर की कैसी,हंसी से हमको बना रहे हो
गधे पे चढ़ के लो हम ये आए बने बनाए तेरी गली में
लिखा तुझे खत------
तुम्हारे गालों पे--------
बहुत अच्छे शेर बन पडे हैं
भाभी को बताती हूँ आपके पिता जी को क्या कह रहे हैं गद्जिल्ला? अब के जो जूते पडेंगे मेरे सामने वो सब को बताऊँगी\ बहुत अच्छा लिखते हैं आप। आपको व परिवार को होली की हार्दिक शुभकमनायें

प्रकाश पाखी ने कहा…

आदरणीय अदा जी,
हमदर्दी के लिए शुक्रिया,एक डॉक्टर और एम्बुलेंस तत्काल भेज दे ,एहतियात के तौर पर सही फिलहाल स्थिति तनावपूर्ण परन्तु नियंत्रण में है.संजय जी के भड़काऊ बयानों और आदरणीय निर्मला दी के कड़े रूख से अब पूरी संभाबना है कि डॉक्टर कि जरूरत है. हरकीरत जी,शाहिद साहब,अल्पना जी,शिल्पी जी,अभिजीत,का शुक्रिया.समीर सा आभार
आप सब को होली कि शुभकामनाएं!

दीपक 'मशाल' ने कहा…

इस बार रंग लगाना तो.. ऐसा रंग लगाना.. के ताउम्र ना छूटे..
ना हिन्दू पहिचाना जाये ना मुसलमाँ.. ऐसा रंग लगाना..
लहू का रंग तो अन्दर ही रह जाता है.. जब तक पहचाना जाये सड़कों पे बह जाता है..
कोई बाहर का पक्का रंग लगाना..
के बस इंसां पहचाना जाये.. ना हिन्दू पहचाना जाये..
ना मुसलमाँ पहचाना जाये.. बस इंसां पहचाना जाये..
इस बार.. ऐसा रंग लगाना...

होली की उतनी शुभ कामनाएं जितनी मैंने और आपने मिलके भी ना बांटी हों...

संगीता पुरी ने कहा…

होली की अनेको शुभकामनाएं !!

अनूप शुक्ल ने कहा…

वाह!हम तो आपको शरीफ़ आदमी समझते थे। धोखा हुआ आप तो बहुतै शरीफ़ निकले!

होली मुबारक!

अपूर्व ने कहा…

वाह पाखी साहब..खतरनाक रहा यह आपका होलीगेट..आपके घर के पास मे कोई पानी की टंकी है क्या..और इन पंक्तियों पे क्या कहूँ..

’शमाशा,ये तुमसे नहीं तुम्हारे नोट्स से प्यार करते है...और तुम्हारे प्रोफ़ेसर पिता से प्रेक्टिकल में नंबर लेना चाहते है...ये तुम्हे धोखा दे रहे है.. तुम्हारा असली प्यार मैं हूँ मैं!’

कामेडी और ट्रेजेडी मे भी अक्सर कुछ शब्दों का फ़ासला होता है!!!.
होली की आपको ढेर सारी शुभकामनाएँ

kshama ने कहा…

यूँ वीर है हम मसल दें हाथी न डर है कोई जो बाघ आये
है गाडजिल्ला जो बाप तेरा, पकड़ मसल दे तेरी गली में

तुम्हारे गालों पे रंग मल कर जो चंग बजता है मेरे दिल का
सुरंग होली हो संग तुम हम तो भंग पीते तेरी गली में
Ha,ha,ha, ha! Ab aur nahee hans sakte!

सागर ने कहा…

मस्त पोस्ट है भाई... मज़ा आ गया.

psingh ने कहा…

प्रकाश जी अनूठा प्रयोग
आभार