गुरुवार, 12 मार्च 2009

मेरी पहली अभिव्यक्ति....बकरा

काफ़ी दिनों से इस उधेड़ बुन में था की हिन्दी में ब्लॉग कैसे लिखा जाय ?खैर, संजय ने समस्या सुलझा दी .नतीजे में एक और ब्लॉग आत्मा आपके सामने है।

आज कुछ मल्टी लेवल मार्केटिंग के बन्दे मेरे पास आए.देश के लाखो बिना मेहनत के रातोरात करोड़पति बनने का सपना देखने वाले एलीटक्लब में मैं भी चार बार शामिल हो चुका हूँ .और हर बार मैंने अपनी मेहनत की कमाई को बिना किसी मेहनत गवाया है.अलबत्ता मैं यह तो नही बता सकता की मैंने गीता के सहज योग की प्रेरणा अथवा अंतर्मन के लालच की पराकाष्ठा ,किस वजह से उनको धैर्य से सुना .पर उन्होंने जो कुछ भी सफलता की सीढ़ी मेरे सामने चित्रित की मैं उसे आपके सामने रखना चाहता हूँ ।

सन्क्षेप में बताया जायतो करोड़पति बनने अथवा लिमोसिन खरीदने अथवा पाम बीच आइलैंड पर घर खरीदने का एक सबसे सरल तरीका है ,और वे लोग किसी ईशवरीय प्रेरणा से केवल आप जैसे लोगो के उद्धार के लिए निस्वार्थ भावना से आपके पास आए है .आपको इसके लिए केवल अपनी मेहनत की कमाई वह छोटा सा हिस्सा जिसके बिना आपको अपने मासिक राशन को कुछ और समय के लिए उधार लाना भर पड़ेगा ।

एक बार इस महान त्याग के बाद आप इस के मेंबर बन जायेगे जिनको वे बकरा कहते है .बस एक बार बकरा बनने के बाद आप को अपने जैसे तीन और लोगो को बकरा बनाना होगा , उसके बाद आप कुत्ते बन जायेगे .यह आपकी सफलता की पहली सीढ़ी होगी .बाद में जब तीन कुत्ते आपके दाई ओर तथा तीन बाई ओर हो जायेगे तो आप कमीने बन जायेगे .इसी तरह से आप कमीनो को जोड़ कर नीच तथा कई नीचो को जोड़कर नराधम बन जायेगे ।

तो साथियो , ये है सफलता का शोर्टकट .इसको गैस पेपर या वन वीक सीरिज भी कहते है।

तो अब आप मुझे पाम बीच पर कब बुला रहे हो ।

आपका अपना ,आपके जैसा .................

बकरा .

8 टिप्‍पणियां:

sanjay vyas ने कहा…

भाई वाह!बड़े चुटीले-तीखे अंदाज़ में रातों रात करोडों के सपने बेचने वालों को नंगा किया है आपने. आपके पेन का मुरीद बन गया हूँ.ऐसे ही पोस्ट पे पोस्ट ठेलते रहें ताकि हम जैसों का भी उद्धार हो जाय.

abhivyakti ने कहा…
इस टिप्पणी को लेखक द्वारा हटा दिया गया है.
Kishore Choudhary ने कहा…

आपके शब्द सामर्थ्य ने किंचित विचलित कर दिया, ये सच है और आपकी तरह साफगोई से लिख पाना मुश्किल भी. पोस्ट निसंदेह लाजवाब है और मैं आश्चर्य चकित हूँ कि किस तरह आप यहाँ तक पहुंचे ? मेरी कहानी को आपने कुछ ज्यादा ही सम्मान दिया है फिर भी इससे मेरा हौसला बढेगा ही. आप जैसे गुणी और विद्वान् के चंद शब्द ही काफी है मेरी रोशनी के लिए. आप नयी पोस्ट लिखेंगे इस उम्मीद में.

Nandani Mahajan ने कहा…

बहुत सुन्दर व्यंग आपने जैसा होता है ठीक वैसा ही किहा डाला है, भाषा बहुत सुन्दर है आपकी और मेरे ब्लॉग पर आप द्वारा की गयी टिपण्णी बहुत पसंद आई मुझे, धन्यवाद

poemsnpuja ने कहा…

ब्लॉग्गिंग में आपका स्वागत है...अब तक यहाँ कुत्ते बिल्ली इंसानों के साथ मिल कर पोस्ट करते मिले, हाँ बकरा आज पहली बार मिला है... व्यंग्य में धार है और कविताओं में नजाकत...वक़्त के साथ सब और निखर कर सामने आएगा......उम्मीद है आप लिखते रहेंगे

abhivyakti ने कहा…

बहुत बहुत धन्यवाद पूजा जी,आपने मनो बल को बहुत बढाया आपकी प्रेरणा और मार्गदर्शन का सदा इंतजार रहेगा..आभार !शुक्रिया संजय जी और किशोरजी नवोदित का मान बढ़ने के लिए...इसके अलावा आपसे ब्लॉग पर टिप्स की चाह रहेगी, सुन्दर फोटो कैसे ब्लॉग पर लाये जाते है समझाए ...नंदिनी जी आप की कविता बेहद प्रभावशाली थी आपकी नई रचना का इन्तजार रहेगा,

आलोचना ने कहा…

sandar

ompal ने कहा…

great dada....this reveals yet another unseen facet of ur wonderful personality....u hav always been an inspiration for me.... now few more things to emulate form u..... i m proud to hav met u and known u.... a right man in the wrong line....u shud hav been a writer and a poet rather than an officer