फिर एक के बाद एक तीन मीटिंगें..फिर दो प्रकरणों में सुनवाई..आगे की पेशी देने के सिवाय चारा नहीं था..उसके बाद आठ दस लोगों के अपाईंटमेंट्स आधे घंटे में निपटाए.फिर आम आदमी के लिए ड्राइविंग लाईसेन्स की प्रक्रिया पारदर्शी बनाने और ड्राइविंग ट्रायल की सख्त प्रक्रिया लागू करने पर लम्बी मीटिंग चली.दिन के तीन कब बज गए पता ही नहीं चला.अचानक मोबाइल की घंटी बजी.मैनें यंत्रवत अपने सामने टेबल पर रखी फाइलों पर दस्तखत करना जारी रखते हुए उसे ऑन करते हुए कंधे और कान के बीच खोंस दिया.
''हलो...''
''पापा!बताओ आज क्या है?''मेरे छोटे बेटे ध्रुव की चहकती आवाज फोन पर सुन कर जैसे सारी चिंताएं,परेशानियां और अवसाद लुप्त हो गए.
''हाँ, बेटा..आज तो आपका जन्म दिन है..''मुझे याद आया कि आज ध्रुव नौ वर्ष का हो गया है,''मैनी हैप्पी रिटर्न्स ऑफ़ द डे...हैप्पी ब डे बेटा...''
''आप भूल गए थे...है ना पापा.''
''हाँ,बेटा....हमेशा की तरह ...पापा से गलती हो गई.अब जल्दी से बताओ तुम्हारे लिए बर्थ डे गिफ्ट क्या लाना है?''
''कुछ नहीं पापा...बस ..आप कब आओगे?''
''तीस को तुम्हें और ममा को लेने आऊँगा...तुम अब अपनी पसंद बताओ.''
''कुछ नहीं पापा...''
''क्यों बेटा?'' मेरा स्वर बेजान सा था. मुझे लगा कि उसके जन्म दिन को याद नहीं रखने की भूल की क्षतिपूर्ति एक तोहफे से करने का मेरा प्रयास बचकाना था.
''कुछ नहीं पापा...जो आपकी मर्जी हो ले आना.बस महंगा नहीं होना चाहिए...ममा कहते है पैसे बचाने चाहिए.''
मैं एक गहरी सांस छोड़ कर रह गया.
''अच्छा पापा ...हॉट व्हील कलेक्शन ले आना.''वह अपनी पसंद नहीं बता रहा था.उसने मेरे अपराध बोध को महसूस कर लिया था इस लिए कह रहा था.
''ठीक है बेटा,ईश्वर तुम्हारी आयु विद्या यश बल में वृद्धि करे.''
उसके बाद मेरा मन काम में बिलकुल नहीं लगा.छ बजने के बाद जब घर पहुंचा तो सबसे पहले लेपटॉप खोल लिया.ध्रुव लगभग एक माह से अपने नाना नानी के पास था.इस अन्तराल में उससे एक आध बार ही बात हुई थी.सोचने लगा एक जिम्मेदार पद अपनी कीमत मांगता है.जब हम एक लोक सेवक का दायित्व पूरा करते है तो पारिवारिक दायित्वों से बहुत कुछ समझौता करना पड़ता है.
पर आज की पोस्ट सिर्फ ध्रुव के लिए है.एक पापा का अपने प्यारे बेटे के नाम एक ख़त...
प्यारे बेटे ,
एक पापा के रूप में तुम्हारे प्रति अपनी जिम्मदारी को कहीं कम निभा पाऊँ तोमुझे माफ़ कर देना..पर मैं तुम्हें यह बताना चाहता हूँ किमैं तुम्हें बहुत प्यार करता हूँ.तुम्हारे स्कूल के प्रोजेक्ट्स में मैंने शायद ही कभी तुम्हारी मदद की हो ,पर तुम हमेशा अपना काम खुद ही बहुत अच्छी तरह से कर लेते हो...मैं जानता हूँ अगर मैं थोडा सा भी समय दे पाता तो तुम्हें बहुत ख़ुशी मिलती.. तुम्हारे स्कूल में इतिहास पुरुषों के विषय पर फैंसी ड्रेस के कम्पीटिशन था.तुम बाजार जाकर ममा के साथ टीपू सुलतान की ड्रेस ले आये थे.मैंने तुम्हें एक दिन पहले टीपू सुलतान पर कविता की चार पंक्तियाँ लिख कर देने का वादा किया था.उस दिन में किसी काम से शहर से बाहर था.
''पापा कब आ रहे हो ? मुझे तैयारी करनी है.''तुम्हारा पहला फोन शाम पांच बजे आया था.
''बस थोडी देर में बेटा..!'' मैंने कहा था.
''पापा अब तो आ जाओ..कितनी देर हो गई है..''तुमने सात बजे फिर पूछा था.
''आ रहा हूँ बेटा.''मैंने फिर कहा था.
''पापा आपने प्रोमिस किया था..''रात नौ बजे तुमने उदास स्वर में पूछा था.
मैं उस रात ग्यारह बजे घर पहुंचा था.तुम इन्तजार करते करते टीपू सुलतान की ड्रेस में ही सो गए थे.
मैंने रात बारह बजे तुम्हारे लिए ये पंक्तियाँ लिखी -
मैं हूँ टीपू सुलतान
अपने वतन पर कुर्बान
मैसूर का शेर हूँ
आजादी का दीवाना
मेरी तलवार का
लोहा दुशमन ने माना
श्रीरंग की लड़ाई में
मैंने अपनी जान दी
अपने वतन के लिए
जिन्दगी कुर्बान की
सुबह उठकर तुमने जल्दी जल्दी ये पंक्तियाँ याद की थी.शाम को तुमने बताया कि तुम दूसरे स्थान पर पर रहे तो मैंने कहा था कि अगर मैं तुम्हें समय पर कविता लिखकर देता तो शायद तुम प्रथम आसकते थे.पर तुमने कहा था कि पापा,अगर आप कविता न लिखते तो मुझे यह स्थान भी नहीं मिलता...तुम्हें बता नहीं सकता यह सुनकर मुझे कितना अच्छा लगा था.
मैं जानता हूँ तुम ,तुम्हारे बड़े भाई देवेयऔर तुम्हारे ममा को मेरे थोड़े से समय देने से बहुत ख़ुशी मिलती है.
पर तुम सब लोग मुझे दुनिया में किसी और कि तुलना में सबसे ज्यादा समझ पाते हो ..मुझे तुम सब पर गर्व है.
मैं तुम पर दुनिया से बेहतर करने का बोझ कभी नहीं डालना चाहूंगा..हाँ,यह जरूर चाहता हूँ कि हर बार खुद से बेहतर करो.अपना होम वर्क ,अपनी पढाई तब तक करना जब तक तुम्हें ये मजेदार लगे...कभी कभी सोचता हूँ कि हम माँ बाप तुम्हें नौ साल की उम्र में ज्यदा बड़ा तो नहीं बना रहे है.
जब तुम गली के बच्चों के साथ खेलकर जेब में कंचे लिए सर से पाँव तक धुल से सने आते हो तो तुम्हारे ममा झल्लाते है,''कौन कहता है कि यह लड़का कोनवेंट में पढता है...शकल देखो इसकी...चलो,अभी नहा के आओ.''
और तुम मेरी गोद में आकर छुप जाते हो ,तो मुझे गर्व होता है हमने तुमसे तुम्हारा बचपन नहीं छीना है..रोज सुबह उठता हूँ तो सबसे पहले तुम्हारा चेहरा देखता हूँ..मुझे लगता है सारा दिन अच्छा गुजरेगा.पिछले महीने भर से तुम्हारी फोटो सुबह उठते ही देखता हूँ.
आशा करता तुम्हारे नाना नानी कुशल होंगे...देवेय से इस संडे को भी बात नहीं कर पाया...भूल गया...पर तुम और तुम्हारे ममा हर बार उससे बात कर पाते हो,इससे तसल्ली होती है.उम्मीद करता हूँ तुम्हारे ममा और तुम्हारी यह छुट्टियाँ मजे से गुजरेंगी.
बहुत सारा आर्शीवाद औ ढेर सारा प्यार....
तुम जियो हजारो साल !
तुम्हारा
पापा