जिनके इशारों को ढूंढती है कई नजरें
उनको चाहते कई दिल वो बेखबर तन्हा होते है
हजारों सजदों का ईनाम हासिल जिन्हें
कई तकदीरों के मालिक वो अक्सर तन्हा होते है
उनके आँगन में लगे है मेले हमेशा से
बाहर खुशियों के आलम वो अन्दर तन्हा होते है.
मुश्किलों में हाथ थामे मंजिलों तक साथ देते
कोई राह नई दिखादे, वो रहबर तन्हा होते है
सख्त जान परिंदों के पंख मजबूत है 'पाखी'
होतीं परवाजें लम्बी पर सफ़र तन्हा होतें है
'पाखी'